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'एक राष्ट्र, एक चुनाव' विधेयक पर चर्चा के लिए आज जेपीसी की पहली बैठक - JPC first meeting today to discuss 'One nation, one election' bill

‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ विधेयक पर चर्चा के लिए आज जेपीसी की पहली बैठक – JPC first meeting today to discuss ‘One nation, one election’ bill

‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ प्रस्ताव पर विचार-विमर्श के लिए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) बुधवार को बैठक करेगी। यह विधायी पहल लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने की योजना है, जो वर्तमान राजनीतिक माहौल में चर्चा का विषय बनी हुई है। बैठक का उद्देश्य विधेयक की गहन समीक्षा करना और विपक्ष द्वारा उठाए गए मुद्दों पर चर्चा करना है।

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इस प्रस्ताव का उद्देश्य पूरे भारत में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के लिए एक साथ चुनाव कराना है, जिससे चुनावी प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया जा सके। यह विधेयक संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान पेश किया गया था और व्यापक जांच के लिए जेपीसी को सौंपा गया है।

जेपीसी की पहली बैठक आज सुबह 11 बजे होगी, जिसमें कानून और न्याय मंत्रालय के अधिकारी प्रस्ताव पर अपनी प्रस्तुति देंगे। 31 सदस्यीय समिति का नेतृत्व भाजपा सांसद पीपी चौधरी कर रहे हैं, और इसमें लोकसभा और राज्यसभा के कई वरिष्ठ सदस्य शामिल हैं।

सदस्यों में कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा और मनीष तिवारी, एनसीपी की सुप्रिया सुले, टीएमसी के कल्याण बनर्जी और भाजपा के बांसुरी स्वराज और अनुराग सिंह ठाकुर शामिल हैं।

कांग्रेस पार्टी ने इस प्रस्ताव को अलोकतांत्रिक करार दिया है। उनका तर्क है कि यह व्यवस्था राष्ट्रीय दलों को क्षेत्रीय दलों के मुकाबले अनुचित लाभ पहुंचाएगी। कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने इसे जटिल और चुनौतीपूर्ण बताया, जिसे लागू करना आसान नहीं होगा।

वामपंथी दलों ने भी इस प्रस्ताव की आलोचना करते हुए कहा कि यह भारत के संघीय ढांचे और राज्य विधानसभाओं की स्वायत्तता को कमजोर करेगा। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI), CPI (मार्क्सवादी), CPI (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी और ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक ने एक संयुक्त बयान में इसे सत्ता केंद्रीकरण का प्रयास बताया।

केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने इस प्रस्ताव का बचाव करते हुए इसे व्यावहारिक और महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इससे चुनावों की बारंबारता कम होगी, जिससे जनता पर बोझ और चुनावी खर्च दोनों में कमी आएगी।

जेपीसी अध्यक्ष पीपी चौधरी ने कहा कि यदि आदर्श आचार संहिता कम बार लागू होती है, तो विकास परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने में मदद मिलेगी। उन्होंने चुनावों के अलग-अलग समय पर होने के कारण बढ़ते खर्च और जनता की थकावट को भी रेखांकित किया।

 

‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ विधेयक पर चर्चा के लिए आज जेपीसी की पहली बैठक –

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