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आज चैत्र नवरात्रि का पांचवा दिन, जानिए मां स्कंदमाता की पूजा विधि, मंत्र, और कथा - Today is the fifth day of chaitra navratri, know the worship method, mantra, and story of mother skandamata

आज चैत्र नवरात्रि का पांचवा दिन, जानिए मां स्कंदमाता की पूजा विधि, मंत्र, और कथा – Today is the fifth day of chaitra navratri, know the worship method, mantra, and story of mother skandamata

चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। आज, गुरुवार, 3 अप्रैल 2025 को चैत्र नवरात्रि का पांचवा दिन है। इस दिन मां दुर्गा के पंचम स्वरूप, मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। मां स्कंदमाता, भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता हैं और उन्हें ममता व करुणा की देवी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां स्कंदमाता की पूजा-अर्चना करने से सुख, समृद्धि और संतान सुख की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं मां स्कंदमाता की पूजा विधि, भोग, मंत्र, शुभ रंग और कथा।

Disclaimer : यह खबर सोशल मीडिया के माध्यम से प्राप्त हुई है। JPB News 24 इस खबर की आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं करता है। अधिक जानकारी के लिए आप हमें संपर्क कर सकते हैं

मां स्कंदमाता की पूजा विधि 

– प्रातः स्नान कर साफ वस्त्र धारण करें।
– मंदिर को गंगाजल से शुद्ध कर मां स्कंदमाता की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
– मां को रोली, कुमकुम, अक्षत, फूल, धूप, दीप आदि अर्पित करें।
– मां स्कंदमाता को केले का भोग लगाएं।
– मां के मंत्रों का जाप करें।
– अंत में मां की आरती करें और परिवार में प्रसाद वितरित करें।

मां स्कंदमाता का मंत्र

सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी।।

ध्यान मंत्र

या देवी सर्वभू‍तेषु मां स्कंदमाता रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

मां स्कंदमाता का भोग 

मां स्कंदमाता को विशेष रूप से केले का भोग चढ़ाया जाता है।

मां स्कंदमाता का शुभ रंग 

नवरात्रि के पांचवें दिन पीला और सफेद रंग शुभ माना जाता है।

मां स्कंदमाता की कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, तारकासुर नाम का एक राक्षस था, जिसने ब्रह्मा जी की कठोर तपस्या कर अमरता का वरदान मांगा। ब्रह्मा जी ने उसे समझाया कि अमरता असंभव है, तो उसने वरदान मांगा कि केवल भगवान शिव के पुत्र के हाथों ही उसकी मृत्यु हो।

तारकासुर को विश्वास था कि भगवान शिव कभी विवाह नहीं करेंगे, जिससे वह अमर रहेगा। लेकिन देवताओं के अनुरोध पर भगवान शिव ने मां पार्वती (स्कंदमाता) से विवाह किया और उनके पुत्र कार्तिकेय (स्कंद) का जन्म हुआ। स्कंदमाता से युद्ध कौशल सीखने के बाद कार्तिकेय ने तारकासुर का अंत किया।

 

आज चैत्र नवरात्रि का पांचवा दिन, जानिए मां स्कंदमाता की पूजा विधि, मंत्र, और कथा –

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