
चैत्र नवरात्रि 2025 का पावन पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ देशभर में मनाया जा रहा है। आज शुक्रवार, 4 अप्रैल को चैत्र नवरात्रि का छठा दिन है। इस दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। मां कात्यायनी को महिषासुर मर्दिनी भी कहा जाता है क्योंकि उन्होंने असुर महिषासुर का वध कर देवताओं को मुक्त कराया था। मां कात्यायनी का रंग सुनहरा होता है। वे सिंह पर सवार होती हैं और उनकी चार भुजाएं होती हैं। दाहिने हाथ में वे अभय और वर मुद्रा में होती हैं जबकि बाएं हाथों में तलवार और कमल का फूल धारण करती हैं।
मां कात्यायनी की पूजा विधि
– सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
– पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें।
– मां कात्यायनी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
– घी का दीपक जलाएं और उन्हें रोली, अक्षत, धूप व पीले फूल चढ़ाएं।
– मां को भोग अर्पित करें।
– मां के मंत्रों का जाप करें और अंत में आरती करें।
– प्रसाद सभी को बांटें।
मां कात्यायनी का भोग
इस दिन मां कात्यायनी को शहद या शहद से बनी खीर का भोग अर्पित किया जाता है। यह भोग आरोग्यता और मधुरता का प्रतीक माना जाता है।
मां कात्यायनी का प्रिय रंग
मां को पीला रंग अत्यंत प्रिय है। इस दिन पीले वस्त्र धारण करना और पूजा में पीले फूलों का प्रयोग करना शुभ माना जाता है।
मां कात्यायनी के मंत्र
कात्यायनी महामाये, महायोगिन्यधीश्वरी।
नन्दगोपसुतं देवी, पति मे कुरु ते नमः॥
स्तुति मंत्र:
या देवी सर्वभूतेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
मां कात्यायनी की कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार, महर्षि कात्यायन ने देवी भगवती की कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर मां ने उनके घर पुत्री रूप में जन्म लिया और मां कात्यायनी के नाम से प्रसिद्ध हुईं। बाद में, उन्होंने महिषासुर का वध कर त्रिलोक में शांति स्थापित की। इसलिए मां कात्यायनी को शक्ति, साहस और विजय की देवी माना जाता है।
चैत्र नवरात्रि 2025 का आज छठा दिन, जानें मां कात्यायनी की पूजा विधि, मंत्र, भोग, शुभ रंग और पौराणिक कथा –
Today is the sixth day of chaitra navratri 2025, know the worship method of maa katyayani, mantra, offering, auspicious color and mythological story