संदीप – सोमवार को एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी का समापन बेहद रोमांचक अंदाज़ में हुआ, जब भारत ने इंग्लैंड को 6 रनों से हराकर पाँच मैचों की सीरीज़ 2-2 से बराबर कर दी। यह मुकाबला 25 दिनों तक चला, जिसमें दोनों टीमों के बीच ज़बरदस्त टक्कर देखने को मिली। लेकिन इस रोमांचक सीरीज़ में कुछ विवादास्पद पल भी सामने आए, जिनमें से सबसे बड़ा विवाद मैनचेस्टर टेस्ट से जुड़ा था।
मैनचेस्टर में खेले गए चौथे टेस्ट मैच के दौरान इंग्लिश कप्तान बेन स्टोक्स ने भारतीय टीम को ड्रॉ पर सहमति का प्रस्ताव दिया, जिसे रवींद्र जडेजा ने अस्वीकार कर दिया। जडेजा और वाशिंगटन सुंदर की साझेदारी उस समय चल रही थी और दोनों बल्लेबाज़ मजबूत स्थिति में थे। जडेजा के इस फैसले ने सोशल मीडिया पर ज़बरदस्त बहस छेड़ दी। फैंस, क्रिकेट विशेषज्ञ और पूर्व खिलाड़ी इस पर दो गुटों में बँट गए कुछ इसे खेल भावना के खिलाफ बता रहे थे, तो कुछ इसे पूरी तरह सही ठहरा रहे थे।
क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर ने इस विवाद पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए रवींद्र जडेजा और वाशिंगटन सुंदर के फैसले का समर्थन किया है। एक वीडियो में तेंदुलकर ने कहा वाशिंगटन ने शतक बनाया और जडेजा ने भी। वे ड्रॉ के लिए खेल रहे थे, न कि अपने शतकों के लिए। जब इंग्लैंड के गेंदबाज़ उन पर हावी हो रहे थे, तब उन्होंने डटकर मुकाबला किया। तो जब मैच भारत के नियंत्रण में आया, तो उन्हें क्यों रोकना चाहिए?
तेंदुलकर ने इंग्लैंड के उस फैसले पर भी सवाल उठाया, जहाँ बेन स्टोक्स ने गेंदबाज़ी के लिए हैरी ब्रुक को लगाया था। अगर इंग्लैंड हैरी ब्रुक को गेंद देना चाहता है तो यह उनकी मर्ज़ी है। भारत की ज़िम्मेदारी नहीं है कि इंग्लिश गेंदबाज़ों को आराम दे ताकि वे अगले टेस्ट में तरोताज़ा रहें।
कुछ पूर्व क्रिकेटरों का मानना था कि ड्रॉ तय हो चुका था, इसलिए भारतीय बल्लेबाज़ों को आगे नहीं बढ़ना चाहिए था। लेकिन तेंदुलकर ने शुभमन गिल की कप्तानी में खेल रही टीम इंडिया का पूरा समर्थन किया।
मैं पूरी तरह से टीम इंडिया के साथ हूँ चाहे वो गंभीर हो, शुभमन गिल, जडेजा या वाशिंगटन सुंदर। चौथे टेस्ट में सुंदर ने जहां टिककर खेला, वहीं पाँचवें टेस्ट में तेजी से रन बनाकर टीम को जीत दिलाने में मदद की। ये टीमवर्क की मिसाल है।
सचिन तेंदुलकर ने मैनचेस्टर टेस्ट विवाद पर जडेजा और वाशिंगटन सुंदर के फैसले का समर्थन किया –
Sachin tendulkar support jadeja and washington sundar decision on manchester test controversy