ज्योति बब्बर – हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व होता है, विशेषकर जब यह तिथि भाद्रपद मास में आती है। सनातन परंपरा के अनुसार, हर मास की शुक्ल पक्ष की पंद्रहवीं तिथि यानी पूर्णिमा को शुभ और पुण्य फलदायी माना जाता है। इस वर्ष भाद्रपद पूर्णिमा रविवार, 07 सितंबर 2025 को मनाई जाएगी। इस दिन चंद्रमा का उदय शाम 06:26 बजे होगा।
भाद्रपद पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
हिंदू मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु और मां लक्ष्मी की विधिवत पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और सभी दुखों का नाश होता है। सत्यनारायण व्रत कथा, पूजा, उपवास और दान करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है।
भाद्रपद पूर्णिमा व्रत की पूजा विधि :
1. प्रातःकाल स्नान के बाद साफ और पवित्र स्थान पर पीले वस्त्र बिछाकर पूजा स्थल तैयार करें।
2. लक्ष्मी नारायण की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें और उसे गंगाजल या स्वच्छ जल से शुद्ध करें।
3. फूल, रोली, चंदन, धूप, दीप, मिठाई और पंचामृत से श्रीहरि विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें।
4. इसके बाद सत्यनारायण व्रत कथा का श्रवण या पाठ करें।
5. पूजा समाप्ति पर आरती करें और सभी को प्रसाद वितरित करें।
भाद्रपद पूर्णिमा व्रत नियम :
व्रतधारी को सूर्योदय से चंद्रोदय तक उपवास रखना चाहिए।
यदि संभव हो, तो जल भी ग्रहण न करें।
बुजुर्ग, बीमार और बच्चे इस व्रत को फलाहार व दवा के साथ कर सकते हैं।
व्रत के दिन अनाज का सेवन वर्जित है।
व्रत का समापन शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देने के साथ होता है।
चंद्र देवता की पूजा विधि :
भाद्रपद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा विशेष रूप से प्रभावशाली होता है। इस दिन चंद्र देवता की पूजा से मानसिक शांति, चंद्र दोष से मुक्ति और वैवाहिक सुख की प्राप्ति होती है।
पति-पत्नी यदि साथ में स्नान करके चंद्रमा को दूध व जल से अर्घ्य दें, तो उनके दांपत्य जीवन में प्रेम और समृद्धि बनी रहती है।
चंद्रमा को सफेद पुष्प, चावल और मिश्री अर्पित करें।
जानिए भाद्रपद पूर्णिमा 2025 व्रत पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और चंद्र पूजन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी –
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