संदीप – पंजाब इस वक्त बीते 37 वर्षों की सबसे भीषण बाढ़ से जूझ रहा है। 1988 के बाद पहली बार राज्य में इस स्तर की तबाही देखने को मिली है। राज्य के 1,018 गांव पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं और 3 लाख एकड़ से अधिक फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। अब तक 11,300 लोगों को बचाया गया है, जबकि 4,700 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश के कारण सतलुज, ब्यास और रावी नदियां उफान पर हैं, जिससे गुरदासपुर, अमृतसर, तरनतारन, फिरोजपुर, पठानकोट, फाजिल्का, कपूरथला और होशियारपुर जैसे जिलों में भारी नुकसान हुआ है।
बाढ़ के चलते अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है। बरनाला, फिरोजपुर और कपूरथला से एक-एक मौत की पुष्टि हुई है।
सीमावर्ती फाजिल्का जिले में अकेले 41,099 एकड़ कृषि भूमि बर्बाद हो चुकी है। इसके अलावा फिरोजपुर, कपूरथला, पठानकोट और होशियारपुर में भी हजारों हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई है।
बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित जिलों में गुरदासपुर पहले स्थान पर है, जहां कुल प्रभावित गांवों में से लगभग एक तिहाई यानी 323 गांव जलमग्न हो गए हैं। इसके बाद कपूरथला में 107 और फिरोजपुर में 101 गांव बाढ़ की चपेट में आए हैं। एक सरकारी प्रवक्ता के अनुसार, गुरदासपुर जिले से अब तक 2,571 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है और 4,771 लोगों को बचाया गया है। वहीं, फाजिल्का जिले में भी 1,239 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
फिलहाल राज्य में 77 राहत शिविर सक्रिय हैं, जहां 4,729 लोगों को आश्रय और ज़रूरी सहायता मिल रही है। सबसे अधिक 3,450 लोग फिरोजपुर में राहत शिविरों में रह रहे हैं, इसके बाद होशियारपुर और पठानकोट का स्थान है।
कपूरथला के ढिलवां गांव से लापता हुए 42 वर्षीय बूटा मोहम्मद का शव ब्यास नदी में मिला। डीएसपी करनैल सिंह ने बताया कि संभवत वे नदी में फिसल कर गिर गए थे।
एनडीआरएफ की कुल सात टीमें गुरदासपुर में, जबकि फाजिल्का और फिरोजपुर में एक-एक तथा पठानकोट में दो टीमें तैनात की गई हैं। वहीं, एसडीआरएफ ने कपूरथला में दो टीमें राहत कार्यों के लिए तैनात की हैं। सेना, बीएसएफ और वायुसेना भी कपूरथला, गुरदासपुर, फिरोजपुर और पठानकोट जैसे बाढ़ प्रभावित जिलों में सक्रिय रूप से राहत और बचाव कार्यों में जुटी हुई हैं। इसके अलावा, नागरिक प्रशासन और पंजाब पुलिस भी प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता प्रदान कर रही है।
मुख्य सचिव और जल संसाधन विभाग के सचिव कृष्ण कुमार, उपायुक्त आशिका जैन और एसएसपी संदीप कुमार मलिक प्रभावित इलाकों का दौरा कर राहत कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। धुस्सी बांध की स्थिति का भी निरीक्षण किया गया है।
जल संसाधन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) को समय पर पानी न छोड़ने के लिए ज़िम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि यदि जून में बांधों से पर्याप्त मात्रा में पानी छोड़ा गया होता तो बाढ़ का प्रभाव काफी कम होता।
गोयल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अभी तक केंद्र सरकार की ओर से कोई विशेष राहत पैकेज या प्रतिक्रिया नहीं आई है।
भाजपा की पंजाब इकाई के प्रमुख सुनील जाखड़, पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुखबीर सिंह बादल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पंजाब के लिए विशेष राहत पैकेज की घोषणा करने का अनुरोध किया है। वहीं, पंजाब राज्य आईएएस अधिकारी संघ और पंजाब सिविल सेवा अधिकारी संघ ने भी प्रदेश में आई भीषण बाढ़ से प्रभावित लोगों के प्रति एकजुटता और संवेदना व्यक्त की है।
पंजाब में 1988 के बाद सबसे भीषण बाढ़, 3 लाख एकड़ फसल बर्बाद, 1,000 से ज़्यादा गांव जलमग्न –
Worst flood in punjab after 1988, 3 lakh acres of crops destroyed, more than 1,000 villages submerged