सावन माह की शुरुआत के साथ ही देशभर के शिव भक्तों में उत्साह और श्रद्धा का माहौल देखने को मिल रहा है। सावन (श्रावण) मास भगवान शिव को समर्पित होता है और इस पूरे महीने में सोमवार व्रत और प्रदोष काल की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस मास में श्रद्धा और विधिपूर्वक की गई पूजा से भगवान भोलेनाथ जल्दी प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों को मनचाहा वरदान देते हैं।
प्रदोष काल में पूजा क्यों है विशेष?
प्रदोष काल शिव भक्ति के लिए अत्यंत शुभ समय माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, यह वह समय होता है जब भगवान शिव तांडव नृत्य करते हैं और अत्यधिक प्रसन्न अवस्था में होते हैं। ऐसे में इस समय की गई पूजा से भक्तों को विशेष फल की प्राप्ति होती है।
मान्यता है कि प्रदोष काल में की गई शिव आराधना से बाधाओं का नाश, सौभाग्य की प्राप्ति और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। सावन के महीने में जब यह काल आता है, तब इसका पुण्य फल कई गुना अधिक हो जाता है।
क्या है प्रदोष काल?
प्रदोष काल सूर्यास्त के बाद का वह समय होता है, जो लगभग संध्या 6:30 बजे से रात 8 बजे तक रहता है (स्थानानुसार समय में अंतर संभव)। इस काल को शिव पूजन के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।
प्रदोष काल में पूजा कैसे करें?
सावन में प्रदोष काल के दौरान शिव पूजन की प्रक्रिया इस प्रकार होनी चाहिए:
1. सबसे पहले स्नान करके शुद्ध वस्त्र पहनें।
2. घर के मंदिर या साफ स्थान पर एक वेदी बनाएं और उस पर भगवान शिव की प्रतिमा या शिवलिंग स्थापित करें।
3. शिवलिंग पर गंगाजल या शुद्ध जल से अभिषेक करें।
4. इसके बाद बेलपत्र, भस्म, भांग, धतूरा, सफेद पुष्प अर्पित करें।
5. एक दीपक जलाकर शिवलिंग के सामने रखें और ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें।
6. अंत में आरती करें और सभी परिवारजनों को प्रसाद बांटें।
सावन में प्रदोष काल की पूजा का विशेष महत्व, जानिए क्यों इस समय होती है शिव आराधना फलदायी –
The worship of pradosh kaal has special importance in sawan, know why the worship of shiva is fruitful at this time