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सावन के प्रदोष काल में क्यों करनी चाहिए शिव पूजा? जानिए पूजा विधि और महत्व - Why should we worship shiva during the pradosh period of sawan? Know the method of worship and its importance

सावन के प्रदोष काल में क्यों करनी चाहिए शिव पूजा? जानिए पूजा विधि और महत्व – Why should we worship shiva during the pradosh period of sawan? Know the method of worship and its importance

11 जुलाई से श्रावण मास का शुभारंभ हो चुका है और शिव भक्तों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। मान्यता है कि सावन में भगवान शिव की सच्चे मन से पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस पवित्र माह में केवल एक लोटा जल शिवलिंग पर चढ़ाने मात्र से भोलेनाथ प्रसन्न हो जाते हैं। खासकर प्रदोष काल में पूजा करने से शिव कृपा तुरंत प्राप्त होती है।

सावन में प्रदोष काल का महत्व 

हिंदू शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष काल भगवान शिव के तांडव नृत्य का समय माना जाता है। यह समय बेहद शुभ होता है और इस दौरान की गई पूजा से शिव जी प्रसन्न होकर भक्तों को सुख, समृद्धि और शांति का आशीर्वाद देते हैं। इस काल में की गई आराधना विशेष फलदायी मानी जाती है।

कब होता है प्रदोष काल? 

प्रदोष काल सूर्यास्त के ठीक बाद शुरू होता है और आमतौर पर शाम 8 बजे तक चलता है। इस समय को शिव पूजा के लिए सबसे उत्तम माना गया है।

प्रदोष काल में पूजा कैसे करें? 

प्रदोष काल में पूजा के लिए नीचे दिए गए विधि-विधान का पालन करें:

1. सबसे पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।
2. एक साफ स्थान पर वेदी बनाएं और उस पर भगवान शिव की मूर्ति या शिवलिंग स्थापित करें।
3. फिर गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक करें।
4. अब शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, भांग और सफेद फूल अर्पित करें।
5. दीपक जलाकर “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करें।

इस पूजा विधि को करने से आपकी आराधना पूर्ण मानी जाती है और शिव जी की कृपा सहज रूप से प्राप्त होती है।

 

सावन के प्रदोष काल में क्यों करनी चाहिए शिव पूजा? जानिए पूजा विधि और महत्व –

Why should we worship shiva during the pradosh period of sawan? Know the method of worship and its importance

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