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हरतालिका तीज व्रत का धार्मिक महत्व, पौराणिक कथा और पालन के नियम जानें - Know the religious significance, mythology and rules of observance of hartalika teej vrat

हरतालिका तीज व्रत का धार्मिक महत्व, पौराणिक कथा और पालन के नियम जानें – Know the religious significance, mythology and rules of observance of hartalika teej vrat

ज्योति बब्बर – सनातन परंपरा में हरतालिका तीज व्रत को अत्यंत पावन और महत्वपूर्ण माना गया है। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन का प्रतीक है। यह पर्व हर वर्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है, जब चंद्रमा कन्या राशि में और हस्त नक्षत्र में होता है।

यह व्रत विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं और कुंवारी कन्याओं द्वारा किया जाता है, जो शिव-पार्वती से अखंड सौभाग्य और उत्तम जीवनसाथी का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए यह कठिन निर्जल व्रत रखती हैं।

हरतालिका तीज का धार्मिक महत्व 

मान्यता है कि इस व्रत को करने से भगवान शिव और माता पार्वती का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए, और कुंवारी कन्याएं मनचाहा वर पाने के लिए इस व्रत को विधिपूर्वक करती हैं। यह व्रत सुख-समृद्धि, वैवाहिक सुख और पारिवारिक कल्याण का प्रतीक है।

हरतालिका तीज की पौराणिक कथा 

इस व्रत की शुरुआत स्वयं माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए की थी।
महर्षि वशिष्ठ की पत्नी अरुंधती ने भी इस व्रत को विधि-विधान से किया था, जिसके फलस्वरूप उन्हें ऋषियों में श्रेष्ठ स्थान प्राप्त हुआ।
इंद्राणी को इस व्रत के प्रभाव से जयंत जैसे तेजस्वी पुत्र की प्राप्ति हुई थी।
रोहिणी, जिन्होंने यह व्रत किया, उन्हें चंद्रमा की 27 पत्नियों में सबसे प्रिय स्थान मिला।

हरतालिका तीज व्रत के नियम

यह व्रत निर्जल और निराहार (बिना जल और भोजन के) रखा जाता है।
व्रत सूर्योदय से सूर्यास्त तक रखा जाता है, और विशेष परिस्थितियों को छोड़कर यह व्रत आजीवन किया जाता है।
बीमार या गर्भवती महिलाओं को यह व्रत सावधानीपूर्वक या किसी वैकल्पिक तरीके से करना चाहिए।
पीरियड्स के दौरान महिलाएं व्रत रख सकती हैं, लेकिन पूजन या देवी-देवताओं को स्पर्श न करें।
इस दिन सुहागिन महिलाओं को श्रृंगार सामग्री का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
अगले दिन शुभ मुहूर्त में व्रत का पारण अवश्य करें।

 

हरतालिका तीज व्रत का धार्मिक महत्व, पौराणिक कथा और पालन के नियम जानें –

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